‘अन्तर्मन की ध्वनि’ गहन, चिंतन,मनन,रिश्ते नाते ,प्रकृति,ज़िन्दगी, मौत,जुदाई, विदाई,खुशी, गम,आंसू,मुस्कुराहट,मुहब्बत,रंजिश जैसी अनेकों,भावनाएं, अनुभूतियों की अनुपम समविष्टि का सफल प्रयास है। पूरी श्रद्धा के साथ मेरे मन से जुड़े इस काव्य संग्रह को अपने पूज्य माता पिता (श्रीमती पुष्पलता वार्ष्णेय एवं श्री प्रेमपाल आर्य) के श्री चरणों में समर्पित करती हूँ, उनके प्यार,उनके दुलार और उनके मार्गदर्शन का ही ईश्वरीय प्रसाद है कि जिसने मुझे इस लायक बनाया कि मैं अपनी द्वितीय काव्य संग्रह ‘अन्तर्मन की ध्वनि’ लेकर आपके सम्मुख प्रस्तुत हो सकी।
अन्तर्मन की ध्वनि
₹300.00
अन्तर्मन की ध्वनि
Binding: Paperback
Age Limit: 15 Years to 80 Years
Language: English
Pages: 198
ISBN: 978-93-90328-83-3
Category Novels









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